कबीरधाम में नदी की रेत से सोना तलाशने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी जिंदा, मेहनत से चमकती है ग्रामीणों की उम्मीद
रेत में छिपे सुनहरे कणों की खोज, कबीरधाम में विरासत बनी ग्रामीणों की आजीविका।

कबीरधाम :- आधुनिक दौर में रोजगार के कई नए साधन विकसित हो चुके हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में आज भी एक अनोखी परंपरा जीवित है। यहां कई ग्रामीण सुबह से शाम तक नदी की रेत छानकर सोने के महीन कण तलाशते हैं। यह केवल उनकी आजीविका का साधन नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही एक सांस्कृतिक विरासत भी है।

नदी किनारे घंटों तक कड़ी मेहनत करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि रेत में मिलने वाले सोने के छोटे-छोटे कणों को इकट्ठा कर वे अपनी आजीविका चलाते हैं। भले ही हर दिन सफलता नहीं मिलती, लेकिन वर्षों से चली आ रही इस परंपरा पर उनका विश्वास आज भी कायम है।

दिनभर रेत छानते इन ग्रामीणों की मेहनत यह साबित करती है कि परंपरा और आजीविका का रिश्ता कितना गहरा हो सकता है। बदलते समय में भी कबीरधाम की यह अनोखी परंपरा जिले की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए हुए है। नदी की रेत में सोने की तलाश केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि पूर्वजों से मिली उस विरासत का संरक्षण भी है, जिसे ग्रामीण आज भी पूरे समर्पण और धैर्य के साथ निभा रहे हैं।




