
कबीरधाम :- जिले के एक निजी आवासीय स्कूल में पढ़ने वाली 10वीं की नाबालिग छात्रा द्वारा बच्चे को जन्म देने का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। बीजापुर थाने में कथित आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद अब स्कूल प्रबंधन, हॉस्टल की निगरानी व्यवस्था और बाल सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आदिवासी विकास परिषद ने मामले की निष्पक्ष एसआईटी जांच की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
जानकारी के अनुसार, सरकारी योजना के तहत बीजापुर की छात्रा कबीरधाम के एक निजी स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। आरोप है कि छुट्टियों के दौरान अपने गृह क्षेत्र में उसके साथ अनाचार हुआ। इसके बाद वह कई महीनों तक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती रही। फरवरी 2025 में तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे घर ले गए, जहां कुछ दिनों बाद उसने नवजात बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद बीजापुर थाने में मामला दर्ज किया गया।
मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि छात्रा लंबे समय तक हॉस्टल में रही, फिर भी उसकी स्थिति की जानकारी स्कूल प्रबंधन, वार्डन या महिला स्टाफ को क्यों नहीं हो सकी। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि तबीयत बिगड़ने पर स्कूल स्तर पर चिकित्सकीय परीक्षण क्यों नहीं कराया गया।
इस बीच आदिवासी विकास परिषद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जांच केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। परिषद ने स्कूल प्रबंधन की संभावित भूमिका और किसी भी संस्थागत लापरवाही की भी निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है। परिषद के नेता कामू बैगा ने चेतावनी दी कि यदि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, वर्तमान प्राचार्य ने कहा कि घटना उनके कार्यकाल से पहले की है। उनके अनुसार, छात्रा को परिजन 5 फरवरी 2025 को अपने साथ ले गए थे और बाद में परीक्षा में शामिल नहीं होने की जानकारी दी गई थी। स्वास्थ्य परीक्षण से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि उस समय के तत्कालीन प्राचार्य ही इस संबंध में बेहतर जानकारी दे सकते हैं।
फिलहाल आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। वहीं, अब जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि क्या संस्थागत स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं। जांच के निष्कर्ष के बाद ही इस मामले में जिम्मेदारी तय हो सकेगी।



