
कबीरधाम :- जिले में अब डेयरी एनालॉग यानी “एनालॉग पनीर” के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण, विक्रय और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य सुरक्षा आयुक्त, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आदेश के अनुपालन में की गई है।
प्रशासन के अनुसार, डेयरी एनालॉग ऐसा उत्पाद होता है जो देखने, स्वाद और बनावट में पनीर जैसा लगता है, लेकिन उसका निर्माण पूरी तरह दूध से नहीं किया जाता। इसमें वनस्पति वसा, वनस्पति तेल अथवा अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया जाता है। ऐसे उत्पादों की अलग पहचान और लेबलिंग अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ताओं को वास्तविक पनीर और एनालॉग पनीर के बीच स्पष्ट जानकारी मिल सके।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने बताया कि हाल के निरीक्षणों में कई कारोबारी एनालॉग पनीर को सामान्य पनीर, मलाई पनीर या फ्रेश पनीर के नाम से बेचते पाए गए। कई मामलों में निर्धारित लेबलिंग नियमों का भी पालन नहीं किया गया। वहीं होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और कैटरिंग सेवाओं में भी उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं दी जा रही थी कि परोसा जा रहा पनीर वास्तविक है या डेयरी एनालॉग।
उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा, भ्रामक व्यापारिक गतिविधियों पर रोक और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह प्रतिबंध लागू किया गया है।
खाद्य कारोबारियों के लिए निर्देश
जिले के सभी निर्माता, वितरक, थोक एवं फुटकर विक्रेता, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैटरिंग एवं अन्य खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिबंधित डेयरी एनालॉग अथवा उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले नकली पनीर का निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण, विक्रय या उपयोग न करें तथा केवल मानक अनुरूप खाद्य उत्पादों का ही उपयोग और विक्रय सुनिश्चित करें।
विशेष जांच अभियान चलेगा
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने जिलेभर में विशेष निरीक्षण अभियान चलाने की घोषणा की है। जांच के दौरान प्रतिबंधित या भ्रामक उत्पाद मिलने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत जब्ती, उत्पादों का विनष्टीकरण, अभियोजन और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



