
कबीरधाम :- जिले में भारतीय जनता पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। वजह है पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के आमंत्रण पत्रों से लगातार कुछ जनप्रतिनिधि के नाम गायब होना। ताजा मामला करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित भाजपा जिला कार्यालय के लोकार्पण समारोह का है, जहां जारी आमंत्रण पत्र में कवर्धा जनपद अध्यक्ष का नाम शामिल नहीं होने से राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
यह पहला अवसर नहीं है जब किसी भाजपा जनता पार्टी के के जनपद अध्यक्ष कवर्धा का नाम आमंत्रण पत्र से गायब हुआ हो। इससे पहले भी अलग-अलग कार्यक्रमों में कभी अध्यक्ष तो कभी विधायक का नाम नहीं होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने इसे महज प्रशासनिक चूक मानने के बजाय पार्टी के भीतर चल रही कथित गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री के हाथों भाजपा के नए जिला कार्यालय का लोकार्पण होना है, तब इतने महत्वपूर्ण आयोजन के आमंत्रण पत्र में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों के नामों को लेकर ऐसी स्थिति क्यों बनी? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर किसी सुनियोजित रणनीति के तहत कुछ नेताओं को राजनीतिक रूप से किनारे करने की कोशिश की जा रही है?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बार-बार एक जैसी घटनाएं होना कई सवाल खड़े करता है। आखिर किसके इशारे पर संगठन के भीतर इस तरह के संदेश दिए जा रहे हैं? पार्टी के अंदर वह “शतरंज का खिलाड़ी” कौन है जो नामों को लेकर विवाद की स्थिति पैदा कर रहा है? इन सवालों का जवाब फिलहाल संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों के पास ही है।
इधर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दलों को भी भाजपा पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। सोशल मीडिया पर आमंत्रण पत्र साझा कर भाजपा की अंदरूनी कलह को लेकर तंज कसे जा रहे हैं और विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
हालांकि, इस मामले में भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस विवाद को सामान्य चूक बताती है या फिर लगातार उठ रहे सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब देती है।



