कबीरधाम :- कबीरधाम जिले के बोदा, तरेगांव जंगल धान खरीदी केंद्र में धान के रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां समिति प्रबंधक सुरेश कुमार पटेल द्वारा प्रशासनिक नियमों को खुलेआम नजरअंदाज करते हुए धान का भंडारण किया जा रहा है। डैमेज से बचाव के लिए जहां नियमों के तहत दो लेयर डैमेज शीट लगाना अनिवार्य है, वहां केवल तिरपाल बिछाकर धान रखने का जोखिम भरा प्रयोग किया जा रहा है। मौके की स्थिति और भी चिंताजनक है। कहीं धान के बोरे फटे हुए हैं, तो कहीं धान बिखरता नजर आ रहा है, जिससे साफ है कि रखरखाव पूरी तरह लचर है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं, मानो सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा हो।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि – समिति प्रबंधक मीडिया को जानकारी देने से आखिर क्यों बच रहे हैं? क्या यह चुप्पी किसी बड़े खेल की ओर इशारा कर रही है? स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह लापरवाही सिर्फ अनदेखी नहीं, बल्कि संभावित घोटाले की जमीन तैयार करने जैसा है। वही चौंकाने वाली बात यह है कि इसी धान खरीदी केंद्र 2024–25 सत्र में इसी प्रकार की लापरवाही के चलते लगभग 1300 क्विंटल धान का सॉर्टेज सामने आया था। बावजूद इसके, जिला प्रशासन आज तक रिकवरी नहीं कर सका। अब वही हालात दोबारा बनते दिख रहे हैं, जिससे इस वर्ष भी बड़े सॉर्टेज की आशंका गहराती जा रही है।
प्रशासन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बोदा तरेगांव जंगल समिति प्रबंधक द्वारा किया जा रहा यह कृत्य न केवल सरकारी संपत्ति को खतरे में डाल रहा है, बल्कि पूरी धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं— क्या इस गंभीर लापरवाही की निष्पक्ष जांच होगी? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? या फिर तिरपाल के नीचे दबकर सरकारी धान और जवाबदेही दोनों ही गायब हो जाएंगे?
यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कबीरधाम में धान सॉर्टेज का एक और बड़ा मामला सामने आना तय माना जा रहा है।



