
कबीरधाम : – एक समय जीवनदायिनी कही जाने वाली सकरी नदी आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। इस प्राकृतिक धरोहर पर बजरी माफियाओं की नजर लगी हुई है। प्रशासन की अनदेखी और लचर निगरानी के चलते नदी से खुलेआम बजरी खनन किया जा रहा है, जिससे न केवल नदी की गहराई और दिशा प्रभावित हो रही है, बल्कि आसपास की पारिस्थितिकी भी संकट में पड़ गई है।
वही स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि JCB और हाइवा की आवाज़ अब नदी के किनारे आम हो गई है। सकरी नदी मे रात-दिन बजरी खनन जारी है, इस अवैध खनन के चलते नदी की अस्तित्व अब खतरे मे दिखाई पड़ रही है, जिला प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत है। खनन माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिलने की भी आशंका जताई जा रही है, जिससे वे बेखौफ होकर अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या सकरी नदी को बचाने के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाएगा, या फिर यह नदी भी उन तमाम नदियों की कतार में शामिल हो जाएगी जो विकास की दौड़ में खो गईं?



